मृत्युपूर्व कथन सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं की वह पुलिस सामने दिया गया है : सुप्रीम कोर्ट
विजय शंकर सिंह  भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा-32(1) ‘मृत्युपूर्व घोषणा' को मृत व्यक्ति द्वारा दिये गए प्रासंगिक तथ्यों के लिखित या मौखिक बयान के रूप में परिभाषित करती है। यह उस व्यक्ति का कथन होता है जो अपनी मृत्यु की परिस्थितियों के बारे में बताते हुए मर गया था। यह इस सिद्धा…
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शंभूनाथ उवाच
सम्भूंनाथ शुक्ला कनाडा का सामाजिक जीवन- 4 कुछ लोग कहते हैं कि आप कनाडा की बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं, वहीं बस जाओ। यह संभव नहीं है क्योंकि तमाम सारी कूटनीतिक औपचारिकताएँ होती हैं, जो अब नहीं हो सकतीं। दूसरे यहाँ का मौसम हार्ड है। मैं अब यहाँ नहीं रह सकता। तीसरे आदमी को सदैव अपनी मिट्टी प्यारी होती है।…
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आवेश उवाच
आवेश तिवारी  केजरीवाल कथा अब साफ नजर आ रहा है कि शांति भूषण जी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव का आम आदमी पार्टी से बिगाड़ क्यों हो गया। जिस तरह की घटिया बात आज अरविंद केजरीवाल ने की है पिछले 8 सालों में इतनी घटिया बात किसी गए गुजरे भक्त ने भी नहीं की। संविधान विरोधी इस आदमी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई…
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नेता जी होने के मायने
राजेन्द्र मिश्र- कोई यूं ही धरतीपुत्र, किसान मित्र, विकास पुरुष नहीं बन जाता। तभी कोई व्यक्ति यह मुकाम पाता है जब लोगों के दिलों में राज करता है। ऐसे ही थे नेताजी जिनका नाम था मुलायम सिंह यादव। लोकतंत्र की अवधारणा को अपने मन में समेटे हक व हकूक एवं न्याय की लड़ाई  लिए संघर्षरत रहने वाला…
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क्या पूरा सच आ पायेगा सामने अंकिता मर्डर केस का ? पत्रकार मनप्रीत की बेखौफ रिपोर्ट
यशवंत सिंह- अंकिता को किस vip को खुश करने से इनकार करने पर मारा गया…  बहुत बड़ा कांड है ये… गोदी मीडिया के चैनल इस मुद्दे पर जान बूझ कर कुछ नहीं दिखा रहे, कोई खोजपरक शोधपरक पत्रक़ारिता नहीं कर रहे क्योंकि सच्चाई सामने आ जाएगी तो उत्तराखंड में सरकार तो जाएगी ही, भाजपा वाले दौड़ाए जाएँगे।…
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पत्रकारिता और राजनीतिक पार्टियां
सत्येंद्र पी एस- 2014 के इलेक्शन के पहले नरेंद्र मोदी बुक्का फाड़ते थे कि मीडिया उनको भाव नहीं देता, केवल सरकार की बात दिखाता है। बसपा और काशीराम की पूरी रणनीति ही मीडिया के खिलाफ रहकर मीडिया में बने रहने का था। वहीं मुलायम सिंह यादव और सपा के लोग सम्मान, प्लाट वगैरा देकर मीडिया कर्मियों…
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