वरिष्ठ पत्रकार शंभू नाथ की फेसबुक वॉल से - 3


हमारे मित्र, चौधरी Narendra Singh मथुरा के बड़े और सम्मानित वकील हैं। आज पुलिस और वकील विवाद में मीडिया और सोशल मीडिया के सूडो पहरुए पुलिस वालों का चरण-चुम्बन में लगे हैं, तब उनकी बात पर भी मनन करिए।
“पुलिस केवल यह क्यों सोचती है कि वह केवल डंडे मारने के लिए है।मथुरा में जब अराजक तत्वों  ने एसपी मुकुल द्ववेदी की हत्या की, और इसी समय जवाहरबाग में सब इंस्पेक्टर सुभाष यादव की भी हत्या की गई थी। करीब 200 पुलिस कर्मी ड्यूटी पर थे, पर जब उनकी हत्या कर दी गयी, पुलिस वहाँ से भाग गई।
उससे कुछ दिन पूर्व आगरा में  खून से लथपथ DIG को छोड़ कर पुलिस भाग गई। एक महिला पत्रकार ने उनको अस्पताल में भर्ती कराया  क्यो ? उससे कुछ दिन पूर्व मथुरा में कोतवाल खून से लथपथ हो गए साथी भाग गए वह पिटते रहे क्यो ? उससे कुछ ही दिन पूर्व बलदेव में अपने थाने दार को कुल्हाड़ी से वार होने के  बाद कोई पुलिस वाला बचाव में नही पहुँचा क्यों सबके सब भाग गए?
मुझको मुकुल जी बड़ी उम्र के नाते सम्मान बिना विशेष परिचय के देते थे। मुझे वह बहुत भले लगे। इसी प्रकार दरोगाजी की भलमनसाहत से मैं प्रभावित था। जब उनकी बरसी हुई सबसे पहिले अकेला सलामी देने मैं ही पहुँचा। क्यों उनके साथी पुलिसकर्मी कन्नी काट गए!? अन्य तमाम अधिवक्ता पुलिस वालों की मृत्यु पर घरों पर मातम पोषी के लिए सबसे पहिले क्यों पहुँचे? वकील निहत्थे होकर वकील का साथ देते हैं, पर पुलिस वाले तो साथी को मरता छोड़ भाग जाते हैं, क्यों? 
जब DGP सुलखान सिंह मथुरा आये उनसे पुलिस के भाग जाने पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई थी। जब जवाहर बाग जांच के लिए आयोग आया, मुझ सहित अनेक अधिवक्ता गवाही देने सबसे पहिले क्यों पहुँचे? वकील ही PW 1 के रूप में सबसे पहिले मैं 
ही पुलिस के पक्ष में अन्य अधिवक्ताओं के साथ साक्ष्य देने क्यों पहुँचा?
जब पुलिस फंस जाती है तब कभी कभी तो बिना फीस के अधिवक्ता उनकी मदद क्यों करते हैं? पुलिस का पहिला काम डंडा उठाना बन गया है । पुलिस काम तो करती है परन्तु उसकी अब तक ऐसी छवि नहीं बन पाई है कि हम घटनास्थल पर जा रहे हैं।अथवा किसी भी पीड़ित की हम मदद करेंगे।
जब मथुरा के SSP सुभाष जोशी जी थे, उनके पक्ष में मथुरा बार ने सर्वसम्मत प्रस्ताव क्यों किया था? अभी कुछ वर्ष पूर्व जब सैनी जी महिला SSP थीं, तब पूरी बार की भावना उनकी तरफ क्यों थी? उत्तर एक ही है ये सब पुलिस अधिकारी डंडे की भाषा के स्थान पर सेवा की भावना रखते थे। अमरीका जैसी पुलिस बनिये जो गाड़ी बन्द होने पर भी  धक्का देकर फ़ौरन सहायता करते हैं।
देश की छोड़ दीजिये पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी तानाशाही के खिलाफ वकील ही आये थे। मैं कहता हूं वकीलों को मजबूत बना रहने दीजिए हाँ कानून के राज्य की हम वकालत करते रहेंगे।