प्रतिभा की 'प्रतिभा' पर खाकी को बहुत गुमान


रायबरेली (संवाददाता)। ये हैं डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी। कहीं भी बड़े अपराध हों तो पुलिस पहले इन्हें याद करती है। वे घटनास्थल पर पहुंच जाती हैं, दिन हो या रात इसकी परवाह नहीं। अपराध से जुड़ी बारीक चीजों पर निगाहें दौड़ाती हैं। इनका पहला विश्लेषण ही लगभग जांच की दिशा तय कर देता। शायद इसीलिए प्रतिभा की प्रतिभा पर खाकी को बहुत गुमान है। गुरुबक्शगंज के ओनई पहाड़पुर में एक महिला का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था। पैर जख्मी थे। हत्या की आशंका होने पर डॉ. प्रतिभा को बुलाया गया। मौके पर शर्ट की बटन मिली। उन्होंने इसी को आधार बना जांच करने की सलाह दी। महज तीन दिन में हत्यारोपित पुलिस के हत्थे चढ़ गया। प्रेम प्रसंग में महिला का गला घोंटते समय छीना-झपटी में युवक के शर्ट की बटन टूटकर गिर गईमारने के बाद उसे लटका दिया गया था। महिला के पैरों को चूहों ने कुतर दिया था, इसकी पुष्टि जांच के दौरान हुई। शहर के बीचोबीच बेलीगंज में 27 दिसंबर 2017 को रईश परिवार की वृद्धा की हत्या कर दी गई थी। मारने के बाद वृद्धा को फर्श पर घसीटातापमान डिग्री जनवरी गया। फर्श पर खून और हत्यारोपित के पैरों के निशान मिले। फुटोप्रट की स्केल फोटो करायी गई। शक के आधार पर रात में ही नौकरानी के बेटे को बुलाया गया। मिलान हुआ तब हत्यारोपित पकड़ा जा सका। ऐसे ही लगभग एक सैकड़ा से ज्यादा अनसुलझे पुलिस केस प्रतिभा सुलझा चुकी हैं। बतौर वैज्ञानिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला उनकी पहली तैनाती रायबरेली में ही सितंबर 2010 में हुई। आठ वर्षों के कार्यकाल में वह कुछ समय विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ में भी रहीं। एमएससी और पीएचडी की डिग्री तो है ही, प्रतिभा नेट की परीक्षा भी पास कर चुकी हैं। मगर उन्हें ये चौलजग जॉब पसंद है। नौकरी के साथ ही पति व दो बच्चों का ख्याल रखती हैं। मूलरूप से देवरिया की रहने वाली यह शख्सियत मुकदमों की विवेचना में भी पुलिस अधि किारियों की मदद कर रही हैं।